बिहार: क्या फर्जी था भरत तिवारी एनकाउंटर? पटना हाईकोर्ट का कड़ा रुख, राज्य सरकार से जवाब तलब, CBI जांच की मांग


 विशेष रिपोर्ट — संतोष पाण्डेय (संपादक, LNBNews.in)


पटना: बिहार के भोजपुर जिले में हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पटना हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए 3 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब (Counter-Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।


हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद राज्य सरकार और बिहार पुलिस के आला अधिकारियों पर कानूनी व नैतिक दबाव काफी बढ़ गया है।


सबूतों से न हो छेड़छाड़: CCTV और CDR सुरक्षित करने के निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को बेहद अहम माना। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि:

• घटना स्थल और आसपास के सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित (Preserve) किया जाए।

• एनकाउंटर टीम में शामिल पुलिस अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और डेटा को प्रिजर्व रखा जाए ताकि निष्पक्ष जांच में कोई बाधा न आए।


मां की गुहार: "फर्जी है एनकाउंटर, हो CBI या SIT जांच"

भरत तिवारी की मां द्वारा दायर याचिका में पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने एनकाउंटर को पूरी तरह से फर्जी (Staged) बताते हुए कहा कि पुलिस ने कानून को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की है। 


पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए अदालत से इस पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) या किसी स्वतंत्र एसआईटी (SIT) से कराने की मांग की है।


क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि बीते 17 जून को भोजपुर जिले में पुलिस और एसटीएफ (STF) की एक संयुक्त कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि मृतक पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और वह मुठभेड़ में मारा गया। वहीं, दूसरी ओर परिजनों का सीधा आरोप है कि यह एक सोची-समझी हत्या थी और पुलिस ने आत्मसमर्पण के बावजूद गोली चलाई।


28 अगस्त को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त तय की है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के कड़े तेवरों के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन 3 हफ्तों के भीतर अदालत के समक्ष क्या जवाब और तथ्य पेश करता है।


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