बिहार/ग्लास्गो:
बिहार के गया जिले के गौरव और भारतीय सेना के जांबाज हवलदार सोमन राणा ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ा दिया है। उन्होंने पैरा एथलेटिक्स की पुरुष शॉटपुट F-57 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
इसके साथ ही सोमन राणा इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। इस स्पर्धा में भारत के ही एक अन्य एथलीट ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है।
अदम्य साहस और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी
हवलदार सोमन राणा की यह सफलता केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके अदम्य साहस, कभी हार ना मानने वाले जज्बे और संघर्ष की एक लंबी दास्तान है:
जब जिंदगी ने लिया मोड़: दिसंबर 2006 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में ड्यूटी के दौरान एक लैंडमाइन (सुरंग) ब्लास्ट में उन्होंने अपना दाहिना पैर गंवा दिया था।
पुणे से शुरू हुआ नया सफर: कठिन शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पुणे स्थित आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर में पुनर्वास के बाद उन्होंने सेना के पैरालंपिक नोड (Army Paralympic Node) से जुड़कर पैरा खेलों में नई शुरुआत की।
शानदार खेल सफर: खेल के प्रति उनके समर्पण का ही नतीजा है कि उन्होंने पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया है। अब ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ लिया है।
ग्लासगो में ऐसा रहा प्रदर्शन
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में मुख्य मुकाबले के दौरान सोमन राणा ने अपने बेहतरीन थ्रो के दम पर 13.40 मीटर की दूरी तय करते हुए पोडियम पर सर्वोच्च स्थान हासिल किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर देश भर से बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
बिहार की माटी के सपूत और भारतीय सेना के इस वीर जवान की उपलब्धि ने राज्य सहित पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। यह जीत आने वाली पीढ़ियों और युवाओं को विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहने की प्रेरणा देती रहेगी।
साभार / रिपोर्ट: Lnbnews.in

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