पटना/विशेष ब्यूरो (संतोष कुमार पांडेय, स्टेट ब्यूरो चीफ - LNB News):
बिहार में एक तरफ सामान्य शिक्षक बहाली के कई चरण रिकॉर्ड समय में पूरे करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—यानी दिव्यांग (CWSN) बच्चों को पढ़ाने वाले 7,279 विशेष विद्यालय अध्यापकों की भर्ती पिछले तीन वर्षों से फाइलों और आश्वासनों में दबी हुई है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद, मुख्य लिखित परीक्षा संपन्न हुए 9 माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते अब तक न तो अंतिम परिणाम घोषित किया गया है और न ही नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सृजित हुए थे 7,279 पद
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल याचिका संख्या 132/2016 में पारित ऐतिहासिक न्यायादेश के अनुपालन में, बिहार शिक्षा विभाग की 4 जुलाई 2022 की उच्चस्तरीय बैठक में विशेष शिक्षकों के कुल 7,279 पद सृजित करने की स्वीकृति दी गई थी। इसमें शामिल हैं:
• प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 5): 5,534 पद
• मध्य विद्यालय (कक्षा 6 से 8): 1,745 पद
2023 से 2026: तीन साल का लंबा इंतजार और कानूनी प्रक्रिया
अभ्यर्थियों द्वारा साझा किए गए आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक भर्ती का सफर बेहद लंबा और थकाऊ रहा है:
1. दिसंबर 2023: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने BSSTET-2023 पात्रता परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए।
2. फरवरी - जुलाई 2024: 23-24 फरवरी 2024 को पात्रता परीक्षा संपन्न हुई और लंबी प्रतीक्षा के बाद 30 जुलाई 2024 को इसका परिणाम जारी हुआ।
3. जुलाई 2025: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने विज्ञापन संख्या 42/2025 जारी कर मुख्य भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन लिए।
4. जनवरी 2026: 29 जनवरी 2026 को आयोग द्वारा लिखित परीक्षा आयोजित कराई गई और प्रोविजनल उत्तर कुंजी (Answer Key) भी जारी की गई।
5. अक्टूबर 2026 की हकीकत: परीक्षा संपन्न हुए 9 माह बीत चुके हैं, लेकिन अंतिम परिणाम जारी न होने से हजारों योग्य अभ्यर्थी मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
दिव्यांग बच्चों के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात: लेखक राकेश लिम्बा
विशेष शिक्षा क्षेत्र के लेखक और देशभर में दिव्यांग छात्रों व शिक्षकों के हक के लिए आवाज उठा रहे आंदोलनकारी राकेश लिम्बा (सूरतगढ़, राजस्थान) ने LNB News से बातचीत में तीखे सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा:"यह केवल 7,279 बेरोजगार युवाओं की नौकरी का सवाल नहीं है, बल्कि बिहार के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों मूक-बधिर, दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांग बच्चों के भविष्य की अनदेखी है। जब राज्य में अन्य भर्तियों के नतीजे कुछ हफ्तों में आ सकते हैं, तो विशेष शिक्षा के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों? योग्यता साबित करने के बाद भी अभ्यर्थी दर-दर भटकने को विवश हैं।"
अभ्यर्थियों की सरकार और BPSC से प्रमुख मांगें:
1. BPSC विज्ञापन संख्या 42/2025 का अंतिम परिणाम (Final Result) अविलंब जारी किया जाए।
2. चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन (DV) की समय-सीमा तुरंत घोषित की जाए।
3. सभी 7,279 विशेष शिक्षकों को विद्यालयों में पदस्थापित कर दिव्यांग बच्चों की बाधित पढ़ाई को जल्द शुरू किया जाए।
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विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: संतोष कुमार पांडेय (स्टेट ब्यूरो चीफ, LNB News)
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