IDBI Bank Strike: निजीकरण के विरोध में गर्दनीबाग में गरजा बैंक कर्मियों का आक्रोश; दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन से बैंकिंग कामकाज ठप





LNB News डिजिटल डेस्क | पटना (बिहार):

सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थान आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के निजीकरण और उसकी हिस्सेदारी की बिक्री के खिलाफ बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों का असंतोष अब सड़कों पर खुलकर सामने आ गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एंप्लॉइज के आह्वान पर आहूत दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के प्रथम दिन राजधानी पटना के ऐतिहासिक गर्दनीबाग धरना स्थल पर भारी संख्या में बैंक कर्मी और अधिकारी धरने पर बैठे। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में चेतावनी दी है कि लगातार लाभ अर्जित करने वाले इस वित्तीय संस्थान को निजी हाथों में सौंपने की किसी भी कुत्सित साजिश को कतई सफल नहीं होने दिया जाएगा।  

​गर्दनीबाग धरना स्थल पर दिखा व्यापक रोष:


सोमवार को प्रातः
काल से ही गर्दनीबाग धरना स्थल पर विभिन्न बैंकों से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी तख्तियों एवं बैनरों के साथ एकत्रित हुए। वक्ताओं ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कनाडाई फेयरफैक्स समूह (Fairfax Group) को बैंक का नियंत्रण सौंपने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से अनुचित एवं अपर्याप्त है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस संपूर्ण विनिवेश और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता का सर्वथा अभाव है, जिससे यह गंभीर प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या किसी चुनिंदा क्रेता को लाभान्वित करने के लिए यह व्यवस्था तय की गई है।  

​क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है विरोध?


यह संपूर्ण विवाद आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश और उसके प्रबंधन को निजी हाथों में सौंपने के निर्णय से उपजा है। कर्मचारियों और यूनियनों का मुख्य तर्क है कि जब यह बैंक गंभीर वित्तीय संकट और भारी घाटे के दौर से गुजर रहा था, तब बैंक कर्मियों ने दिन-रात परिश्रम कर इसे उबारा था। ऐसे में जब संस्थान पूरी तरह सुदृढ़ हो चुका है, तब इसे औने-पौने दामों पर निजी समूह को बेचना राष्ट्रीय संपत्ति के साथ खिलवाड़ है। फोरम का मानना है कि यह प्रस्तावित निजीकरण संसद को दिए गए आश्वासनों और संविधान की भावना के पूरी तरह विपरीत है।  

​बैंक की सुदृढ़ वित्तीय स्थिति और शानदार आँकड़े:

​धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने बैंक की उत्कृष्ट वित्तीय प्रगति के आँकड़े प्रस्तुत करते हुए अपनी बात रखी:

​अभूतपूर्व शुद्ध लाभ: विगत छह वर्षों की कालावधि के भीतर आईडीबीआई बैंक ने कुल 30,106.43 करोड़ रुपये का शानदार शुद्ध लाभ अर्जित किया है।  

​गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में भारी कमी: वर्ष 2018 में बैंक का सकल एनपीए अनुपात जो बढ़कर 31.78 प्रतिशत तक पहुँच गया था, उसे कर्मचारियों के श्रम और निष्ठा से घटाकर अब मात्र 2.30 प्रतिशत पर लाया गया है।  

​अन्य वित्तीय मानक: इसके अतिरिक्त, बैंक का शुद्ध एनपीए अनुपात गिरकर 0.16 प्रतिशत, पूंजी पर्याप्तता अनुपात 26.38 प्रतिशत तथा प्रावधान कवरेज अनुपात 99.31 प्रतिशत हो गया है।  

​संकट काल का परिश्रम: तत्कालीन आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के कार्यकाल में जब परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा के पश्चात खराब ऋणों का संकट उजागर हुआ था और सरकार तथा एलआईसी (LIC) द्वारा 46,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी निवेश की गई थी, तब बैंक कर्मियों ने कठिन परिश्रम कर इसे पुनर्जीवित किया था।  

​कर्मचारियों की मुख्य माँगे:


निजीकरण प्रक्रिया पर पूर्ण विराम
: सरकार आईडीबीआई बैंक के निजीकरण एवं स्वामित्व हस्तांतरण की संपूर्ण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त करे।  

​सार्थक संवाद का मार्ग प्रशस्त हो: सार्वजनिक निवेश और कर्मचारियों के वैध हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शासन स्तर पर यूनियनों के साथ सार्थक वार्ता प्रारंभ की जाए।  

​आंदोलन को तीव्र करने की चेतावनी: यदि शासन की ओर से इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी जाती है, तो आने वाले समय में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।  

​ग्राहकों एवं जनसाधारण पर प्रभाव:

​इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के परिणामस्वरूप बैंक की शाखाओं में होने वाले भौतिक कार्य, जैसे चेक समाशोधन (Clearance) और अन्य शाखा-आधारित सेवाएँ आंशिक रूप से प्रभावित हुई हैं। यद्यपि, प्रबंधन और यूनियनों द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि ग्राहकों की सुविधा के लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाएँ—यथा यूपीआई (UPI), मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग तथा एटीएम (ATMs)—सुचारू रूप से संचालित रखी गई हैं, ताकि जनसामान्य को असुविधा का सामना न करना पड़े।

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​रिपोर्ट: LNB News डिजिटल डेस्क

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