​गया: फल्गु नदी के कायाकल्प और गिरते भूजल स्तर को लेकर समाहरणालय में हाई लेवल बैठक, डीएम शशांक शुभंकर ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

 



गया (लाइव न्यूज़ ऑफ़ बिहार / LNB News ब्यूरो):  

मोक्षनगरी गया की ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यावरणीय पहचान मानी जाने वाली पवित्र फल्गु नदी के समग्र जीर्णोद्धार, संरक्षण और जिले में तेजी से नीचे जा रहे भूजल स्तर में सुधार को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई विभागों के वरीय पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।


बैठक का मुख्य उद्देश्य फल्गु नदी के प्राकृतिक प्रवाह को संरक्षित करना, नदी के जल को दूषित होने से बचाना तथा तटीय क्षेत्रों में जल संचयन के जरिए जिले के वॉटर लेवल को सुधारना है।



तटीय इलाकों में बनेगा ग्रीन बेल्ट, प्रदूषण पर लगेगी रोक

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि फल्गु नदी के किनारों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण कर एक मजबूत 'ग्रीन बेल्ट' विकसित किया जाए। इससे न केवल पर्यावरण संतुलित रहेगा, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने में भी बड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा, शहरी व ग्रामीण नालों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे नदी में न गिरे, इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य तकनीकी प्रबंधों की समीक्षा की गई।


भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) पर विशेष जोर

गया जिले में गर्मी के दिनों में पेयजल और गिरते भूजल की गंभीर समस्या सामने आती रही है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए डीएम ने लघु जल संसाधन और ग्रामीण विकास विभाग को निर्देशित किया कि:

• आहर, पइन, तालाब और पारंपरिक जल स्रोतों का सघन जीर्णोद्धार किया जाए।

• वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को सरकारी और निजी परिसरों में अनिवार्य रूप से लागू कराया जाए।

• नदी के कैचमेंट एरिया में छोटे चेकडैम और सोखता निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।




इन विभागों के अधिकारी रहे मौजूद



सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग, जल संसाधन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग सहित नगर निगम एवं अन्य संबंधित विभागों के तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।


लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने सभी विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यों को कागजों से बाहर निकालकर तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जल संरक्षण जिले की जीवनरेखा से जुड़े मुद्दे हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर एक संयुक्त कार्ययोजना पर तुरंत काम शुरू करें।


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रिपोर्ट: ब्यूरो डेस्क, गया

संपादक: संतोष कुमार पांडेय

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