जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज (मधेपुरा) की बदहाल व्यवस्था: गंदे कॉरिडोर, हॉस्टल की दयनीय स्थिति और छात्रों की समस्याओं पर उठी जांच की मांग


LNB News डिजिटल डेस्क | मधेपुरा (बिहार):

बिहार के मधेपुरा स्थित प्रतिष्ठित जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (JNKTMCH) की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कॉलेज परिसर और छात्रों के हॉस्टल में व्याप्त बुनियादी समस्याओं को लेकर जागरूक नागरिकों और छात्रों की ओर से उच्च स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिसमें स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।  

​प्रशासनिक परिसर और स्वच्छता पर उठे सवाल:






सामने आई शिकायतों और साक्ष्यों के अनुसार, कॉलेज के प्रशासनिक व शैक्षणिक परिसरों में साफ-सफाई का घोर अभाव देखा जा रहा है। गलियारों (कॉरिडोर) में कचरे के ढेर और गुटके के दाग जैसी तस्वीरें सामने आई हैं, साथ ही वॉशरूम और शौचालयों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है। एक सरकारी चिकित्सा संस्थान में इस प्रकार की गंदगी छात्रों और वहां आने वाले मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय है।  

​हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव:

मेडिकल छात्रों के हॉस्टलों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। प्राप्त विवरण के अनुसार, हॉस्टल के कमरों में छात्रों के रहने के लिए पर्याप्त और उचित व्यवस्था नहीं है। कमरों में बेड और स्टडी टेबल जैसे अति आवश्यक फर्नीचर तक का अभाव है, जिससे नीट (NEET) जैसी कठिन प्रतियोगिता पास कर के देश का भविष्य बनने आए मेधावी छात्रों को भारी मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।  

​संभावित उत्पीड़न या रैगिंग के मामलों पर स्वतंत्र जांच की मांग:

रिपोर्ट्स और शिकायतों में यह भी जिक्र किया गया है कि प्रथम वर्ष के कई पुरुष एमबीबीएस छात्रों के सिर और चेहरे पूरी तरह मुंडवाए हुए देखे गए हैं। हालांकि यह स्वेच्छा से है या किसी दबाव में, इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन परिस्थितियों के मद्देनजर कॉलेज परिसर में किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव, जबरदस्ती या रैगिंग की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। छात्रों ने उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के असहयोगात्मक रवैये को लेकर भी अपनी पीड़ा व्यक्त की है।  

​प्रशासन से प्रमुख मांगें:

इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:

​कॉलेज और हॉस्टल परिसरों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और औचक जांच कराई जाए।  

​प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ गोपनीय संवाद स्थापित कर किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव या रैगिंग की सच्चाई का पता लगाया जाए।  

​व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालेि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।  

​छात्रों की गरिमा, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं (जैसे स्वच्छता और फर्नीचर) को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए।  

​(नोट: LNB News को प्राप्त शिकायतों, तस्वीरों और साक्ष्यों के आधार पर यह जनहित रिपोर्ट तैयार की गई है। इस मामले में कॉलेज प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा।)

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​रिपोर्ट: LNB News डिजिटल डेस्क

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