गया में सांसद सुरेंद्र यादव और पूर्व मंत्री कुमार सर्वजीत का NDA सरकार पर करारा हमला: BTMC गठन में देरी और 48 हजार स्कूलों की बदहाली पर घेरा


 गया (LNB News): बिहार की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर जहानाबाद के सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव और बोधगया के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री कुमार सर्वजीत ने गया में बड़ा हमला बोला है। गया शहर के रामपुर स्थित आवास पर आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (BTMC) के गठन में हो रही देरी, महाबोधि मंदिर परिसर की सुरक्षा व गरिमा और बिहार के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर NDA सरकार को बुरी तरह घेरा।

​आइए जानते हैं प्रेस वार्ता में उठाए गए मुख्य मुद्दे:

​1. BTMC के गठन और सदस्य सचिव की नियुक्ति में जानबूझकर देरी का आरोप

​सांसद सुरेंद्र यादव ने कहा कि 1949 के ऐतिहासिक बोधगया टेंपल एक्ट के तहत मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) का संचालन किया जाता है। नियमानुसार, गया के जिलाधिकारी इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं, जबकि बौद्ध और हिंदू समुदायों से चार-चार सदस्य मनोनीत किए जाते हैं, साथ ही एक सदस्य सचिव की नियुक्ति होती है।

​सांसद ने सवाल उठाया कि पिछली समिति का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बावजूद अब तक नई समिति का गठन और पूर्णकालिक सचिव का चयन क्यों नहीं हुआ? उन्होंने कहा, "देश-दुनिया से लाखों बौद्ध और अन्य श्रद्धालु यहाँ आते हैं, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण मंदिर का प्रशासनिक, वित्तीय और रख-रखाव का कार्य ठप पड़ गया है।" दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कुमार से तुरंत समिति गठित करने की मांग की।

​2. महाबोधि मंदिर की गरिमा और सुरक्षा में लापरवाही पर आपत्ति

​प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री कुमार सर्वजीत और सांसद सुरेंद्र यादव ने महाबोधि मंदिर के भीतर की वर्तमान व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की ज्ञानभूमि शांति, करुणा और आध्यात्मिक साधना का वैश्विक केंद्र है।


नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस पावन मुचलिंद सरोवर (तालाब) के किनारे बैठकर विदेशी सैलानी और बौद्ध भिक्षु ध्यान लगाते हैं, वहां अब पुलिसकर्मी अपने कपड़े सुखा रहे हैं। मंदिर परिसर के भीतर भारी-भरकम बैरिकेडिंग और पुलिस बल की इस तरह की तैनाती मंदिर की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा रही है।

​3. विदेशी चढ़ावे के नियम और 88 लाख रुपये का जुर्माना

​वित्तीय अव्यवस्थाओं पर बोलते हुए नेताओं ने खुलासा किया कि नियमों की समय पर अनदेखी के चलते पूर्व में BTMC पर करीब 88 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगा था। उन्होंने कहा कि मंदिर को मिलने वाले विदेशी दान और एफसीआरए (FCRA) के नियमों का सही समय पर पालन होना चाहिए, लेकिन प्रबंधन समिति न होने से वित्तीय पारदर्शिता और देखरेख पर बड़ा संकट आ गया है।

​4. बिहार के 48 हजार सरकारी स्कूलों में भारी बदहाली का दावा

​शिक्षा के मुद्दे पर नेताओं ने दावा किया कि बिहार के लगभग 48 हजार सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचा, क्लासरूम, शौचालय और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का भयानक अभाव है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कागजों पर विकास की बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत में गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

​5. कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर सरकार से कड़े सवाल

​प्रेस वार्ता के दौरान नेताओं ने राज्य में बढ़ रहे दलित उत्पीड़न और कमजोर वर्गों पर हो रहे अपराधों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल प्राथमिकी दर्ज होने से काम नहीं चलेगा, पीड़ितों को सुरक्षा और वास्तविक न्याय मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने देश में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिशों पर भी कड़ा ऐतराज जताया।

​रिपोर्ट: संतोष कुमार पांडेय

लाइव न्यूज़ ऑफ़ बिहार (LNB News)

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